पंजाब के नए AG के लिए एपीएस दयोल के नाम की सिफारिश, पांच दिन चली सरकार व संगठन के बीच माथापच्ची

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पंजाब सरकार व संगठन के बीच पांच दिन चली माथापच्ची के बाद आखिरकार राज्य के नए एडवोकेट जनरल का नाम तय हो गया है। एपीएस दयोल के नाम की सिफारिश की गई है। बताया जाता है कि सिफारिश राज्यपाल को भेज दी गई 

पंजाब एजी पद के लिए एपीएस दयोल के नाम की सिफारिश। फाइल फोटो

। पांच दिनों की लंबी मशक्कत के बाद आखिरकार पंजाब सरकार ने एडवोकेट जनरल के पद पर सीनियर एडवोकेट अमर प्रीत सिंह दयोल का नाम फाइनल कर दिया है। उनकी नियुक्ति किए जाने की सिफारिश कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार उनके नाम की सिफारिश राज्यपाल को भेज दी गई है।

बता दें, इससे पहले 2017 में जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी थी तब भी एपीएस दयोल के नाम कि चर्चा चली थी, लेकिन बाद में कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट अतुल नंदा को पंजाब का एडवोकेट जनरल नियुक्त कर दिया था। अब कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद अतुल नंदा ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके चलते 19 सितंबर से यह पद खाली था। तब से लेकर पिछले पांच दिनों में इस पद के लिए कई नाम सामने आते रहे। करीब दस नामों पर चर्चा चली और आखिरकार शनिवार को सीनियर एडवोकेट एपीएस देयोल को इस पद पर नियुक्त किए जाने की सिफारिश कर दी ग

सरकार के खिलाफ बड़े केसों की कर रहे हैं पैरवी

दयोल सरकार के खिलाफ कई बड़े केसों की पैरवी कर रहे हैं, उनमें बेअदबी मामले में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी और परमराज उमरांगल का केस भी शामिल हैं। सैनी के खिलाफ चाहे आय से अधिक संपत्ति का मामला हो या सैनी और उमरानंगल के खिलाफ बेअदबी मामले में हुए गोलीकांड में उनके खिलाफ चल रहे केसों में देयोल ही उनकी पैरवी कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने सैनी के खिलाफ 2022 पंजाब विधानसभा चुनावों तक किसी भी मामले में की जा रही कार्रवाई पर जो रोक लगाई है, उसमे दयोल ही सैनी के वकील हैं। वहीं, सैनी को विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार करने के मामले में विजिलेंस चीफ के खिलाफ सैनी ने जो अवमानना याचिका दाखिल की हुई है, उसमे भी देयोल ही सैनी के वकील हैं

भले ही पंजाब सरकार एपीएस दयोल को पंजाब का एडवोकेट जनरल नियुक्त कर दे, लेकिन सरकार के जो मुख्य केस हैं उनमें दयोल सरकार की तरफ से पैरवी नहीं कर पाएंगे। पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व बेअदबी मामलों में आरोपित व्यक्तियों के दयोल वकील रहे हैं व उनको हाई कोर्ट से राहत दिलाई है। आगे की सुनवाई में इन मामलों में उनके खिलाफ सरकार की पैरवी नहीं कर पाएंगे।

दयोल से पहले करीब 10 वकीलों के नामों पर चलती रही 

सीनियर एडवोकेट दयोल से पहले सीनियर एडवोकेट अनमोल रतन सिंह सिद्धू और डीएस पटवालिया का नाम इस पर नियुक्ति के लिए चल रहा था, इसके बाद कई नामों पर पिछले पांच दिनों तक चर्चा चलती रही। लेकिन आखिरकार पंजाब सरकार ने दयोल को इस पद पर नियुक्त करने का निर्णय लेते हुए इसकी फाइल राज्यपाल को भेज दी है।

इसलिए हुई देरी

अक्सर जिस पद पर सबसे पहले नियुक्ति होती है, चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार में वही सबसे आखिर में हो रही है। दरअसल, कैप्टन अमरिंदर सिंह के समय सत्ता का एक ही केंद्र था, लेकिन अब पार्टी प्रधान का अलग, मुख्यमंत्री का अलग, उपमुख्यमंत्री का अलग और हाईकमान का अलग से सत्ता का केंद्र होने के कारण किसी एक नाम पर सहमति नहीं हो पा रही है

सबसे पहले दीपइंद्र सिंह पटवालिया के नाम को मंजूरी दी गई थी। वह सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज कुलदीप सिंह के बेटे हैं। उनके नाम पर लगभग मुहर लग गई थी। वह पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पसंद थे,  लेकिन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अड़ गए। बताते हैं कि उन्होंने इस बारे में राहुल गांधी से भी बात की है कि उनके बड़े भाई पीएस पटवालिया मोदी सरकार में एडिश्नल सालिस्टर जनरल रहे हैं। इसके बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने ही अनमोल रतन सिद्धू के नाम का प्रस्ताव दिया।

 

अंत में एसपीएस दयोल पर सहमति

कल शाम तक अनमोल रतन सिद्धू के नाम पर सहमति बनती नजर आ रही थी, लेकिन जैसे ही चन्नी को कल राहुल गांधी ने दिल्ली में बुलाया तब से उनके नाम पर भी बात ठंडी पड़ गई। इसके बाद एपीएस दयोल का नाम सामने आया। बताते हैं कि दयोल के नाम को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रस्तावित किया और उनके नाम पर ही सहमति बनाई गई।

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