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बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने भारतीय जनता पार्टी सरकार पर खनन के एक पुराने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते कहा कि इससे घबराने की नहीं है बल्कि इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है।
बसपा अध्यक्ष ने रविवार को अखिलेश यादव को फोन कर कहा कि इससे घबराने की बात नहीं है बल्कि इसका डटकर मुकाबला करके, इनके इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है। देश व दुनिया इस हकीकत को जानती है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके अपने विरोधियों प्रताड़ित किया है। सत्ता का दुरूपयोग करते हुये भाजपा के तमाम नेताओं को हर प्रकार के आपराधिक मामलों में बरी करा दिया।
मायावती ने सोमवार को कहा कि खनन के पुराने मामले में सी.बी.आई. द्वारा छापेमारी की जा रही है। उसकी आड़ में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव से पूछताछ करने की धमकी दी जा रही है। उन्होने कहा कि यह पूरी तरह से राजनीतिक विद्वेष की भावना से चुनावी स्वार्थ के लिये किया जा रहा है। इससे घबराने की नहीं है बल्कि इस षडयंत्र को विफल करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की इस प्रकार की घिनौनी राजनीति एवं चुनावी षड़यंत्र कोई नई बात नहीं है। यह उनका पुराना हथकण्डा है जिसे देश की जनता अच्छी तरह से समझती है। जिसका ख़ामियाज़ा आने वाले लोकसभा आमचुनाव में भुगतने के लिये भाजपा तैयार रहना होगा। मायावती ने कहा कि गठबंधन की खबर से भाजपा परेशान है। भाजपा की सरकार के इसारे पर लम्बित पड़े खनन मामले में सीबीआई ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। इसके साथ ही यादव से भी पूछताछ करने सम्बंधी खबर जानबूझकर फैलाई। यह राजनीतिक विद्वेष तथा चुनावी षड़यंत्र के तहत सपा-बसपा गठबंधन को बदनाम और प्रताड़ित करने की कार्रवाई नहीं है तो और क्या है।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस की तरह भाजपा भी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके अपने विरोधियों को फर्जी मामले में फंसाने में माहिर है। बसपा मूवमेन्ट भी इसका भुक्तभोगी रहा है। उन्होने आरोप लगाया कि बसपा ने प्रदेश की लोकसभा की 80 में से 60 सीटे भाजपा को देना स्वीकार नहीं किया तो तब उन्हें ताज मामले में फर्ती तौर पर फंसा दिया था।