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ICC Cricket World Cup 2019 भारतीय टीम के स्ट्रेंथ एवं कडिंशनिंग कोच ने कहा है कि केदार जाधव भी फिटनेस को लेकर सचेत हुए हैं। ...
भारतीय कप्तान विराट कोहली मौजूदा दौर में दुनिया के सबसे फिट खिलाडि़यों में शामिल होते हैं, निश्चित रूप से उनकी फिटनेस को देखकर कोई भी कोच खुश होगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि मौजूदा दौर में भारतीय क्रिकेट टीम को सबसे अच्छी फिटनेस वाली टीम के रूप में देखा जाता है। इसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है भारतीय टीम के 'स्ट्रेंथ एवं कंडिशनिंग' कोच शंकर बासु को
बासु ने भारतीय टीम की फिटनेस पर काफी काम किया है और उनका मानना है कि उनके टीम से जुड़ने के बाद मुहम्मद शमी का चोटों से मुक्त रहकर फिट रहना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। 50 वर्षीय बासु इस बात से संतुष्ट हैं कि चोटों से मुक्त शमी और केदार जाधव भी अब फिटनेस के प्रति सचेत हो गए हैं, जो पहले कोई उचित फिटनेस ट्रेनिंग नहीं करते थे। बासु ने कहा, 'कोई भी कोच विराट को देखकर खुश होगा। उनकी सबसे बड़ी चीज यही है कि वह साल के प्रत्येक दिन किसी भी व्यायाम को करने को तैयार रहते हैं। वह अपने शरीर को जानते हैं और अगर वह ट्रेनिंग कर रहे हैं तो उनके अपनी दिनचर्या के संबंध में सौ सवाल होंगे।
जब उन्हें जवाब मिल जाएंगे तो वह गंभीरता से उनका पालन करते हैं। शमी पिछले सत्र में चोट की वजह से एक भी टेस्ट मैच में बाहर नहीं हुए हैं।' भारत के इस पूर्व जूनियर धावक से जब पूछा गया कि वह इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि समझते हैं तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि शायद, आप ऐसा कह सकते हो। उन्होंने कहा, 'सोचो, वह (शमी) पिछले साल फिटनेस टेस्ट में विफल रहे थे और उनकी निजी जिंदगी में भी कुछ मुद्दे रहे थे। वापसी करने के बाद उन्होंने ट्रेनिंग करना शुरू किया। मैंने शमी को कहा था कि 20 दिन के लिए कड़ी ट्रेनिंग करने का कोई फायदा नहीं है। आपको लगातार ट्रेनिंग करनी होती है। अब ट्रेनिंग उसकी जीवनशैली बन चुकी है। अब उनकी तेजी देखो, जो पांच मैचों की सीरीज के अंतिम टेस्ट के दिन भी कम नहीं होती।
बुमराह जब टीम में आए तो वह फिट लोगों में शामिल नहीं थे, लेकिन उन्होंने अच्छी नींद ली, अच्छा आहार और कड़ी मेहनत करके फिट हो गए।' सभी के प्रशिक्षण के साथ-साथ खाना भी अलग-अलग है और यह एक मिथक है कि इस टीम का प्रत्येक खिलाड़ी कोहली की तरह भुना हुआ खाता है। बासु ने कहा, 'विराट और डीके अच्छी तरह से वेटलिफ्टिंग करते हैं, लेकिन बुमराह और राहुल प्लीमेट्रिक अभ्यास करते हैं जिसमें कूदना शामिल है। इससे पावर और गति बढ़ाने में मदद मिलती है। सभी के शरीर अलग हैं और दिनचर्या भी अलग हैं।' हालांकि बासु को विजय शंकर के ज्यादा चावल खाने से परेशानी नहीं है।
उन्होंने कहा, 'आपको यह समझने की जरूरत है कि शंकर एक अच्छे एथलीट हैं। वह दक्षिण भारत से हैं और उनका कुछ प्रकार के खाने से लगाव है। आप उन्हें इससे दूर नहीं कर सकते। आप हार्दिक पांड्या को देखें, वह हाथी भी खा सकते हैं, लेकिन फिर भी वह पतले ही दिखेंगे।' महेंद्र सिंह धौनी की फिटनेस को लेकर बासु ने कहा, 'धौनी अच्छे से जानते हैं कि उनका शरीर अभी फिट है। यदि हम अच्छी पावर के बारे में बात करते हैं तो मैं इसमें धौनी, रिषभ पंत और पवन नेगी के नाम लूंगा क्योंकि ये तीन पहाड़ी क्षेत्रों से आते हैं। पंत में अविश्वसनीय पावर है।' बासु ने 1987 में टोक्यो में एशियन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
उन्होंने अपने करियर के बारे में कहा, 'आनंद नटराजन (पूर्व 100 मीटर राष्ट्रीय चैंपियन) और मैं एक साथ पढे़ थे। मैं सीनियर स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाया। मेरा सबसे बड़ा फायदा पिछले 25 वर्षो में गलतियों से सीखना है।' जब बासु को भारतीय टीम की नौकरी की पेशकश की गई तो उनके मन में स्पष्ट था कि सभी फिटनेस संस्कृति में बदलाव चाहते हैं और इस दौरान, कोचिंग स्टाफ का समर्थन शानदार रहा। उन्होंने कहा, 'भरत अरुण (गेंदबाजी कोच) मेरे दोस्त हैं और जब मैं उन्हें बोलता हूं कि गेंदबाज एक विशिष्ट संख्या में गेंदबाजी करेंगे तो वह इस बात को मान लेते हैं और संजय बांगर को कुछ बोलता हूं तो वह भी समर्थन करते हैं। हर कोई अब फिटनेस का आनंद ले रहा है। मैंने सोचा कि मुझे एक बार में एक काम करना है। मैं इस आधुनिक क्रिकेट में अलग तरह का प्रशिक्षण लेकर आया। यह सब स्पीड और पावर है। हम नियमित जिम जाने वालों की तरह प्रशिक्षित नहीं हो सकते।'