आनलाइन पढ़ाई से परेशान, एक साथ कई चुनौतियों से जूझ रहे विद्यार्थी, जानिए क्‍या कहते विशेषज्ञ

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RGA न्यूज़

ऑनलाइन क्‍लास और कोरोन की वजह से बच्‍चे प्रभावित।

कोरोना महामारी की वजह से हर वर्ग के लोग परेशान है। अब कोरोना महामारी के चलते घर में रह रहे विद्यार्थी न ठीक से पढ़ पा रहे हैं और न ही भविष्य को लेकर काेई योजना बना पा रहे हैं। मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं

यमुनानगर, कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थी सवा साल से घर पर हैं। न ठीक से पढ़ पा रहे हैं और न ही भविष्य को लेकर काेई योजना बना पा रहे हैं। रही सही कसर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी ने सभी विद्यार्थियों को पास करके पूरी कर दी है। जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर थे वह भी उन विद्यार्थियों के बराबर खड़े हो गए हैं जो वार्षिक परीक्षाओं में टाप किया करते थे। इससे विद्यार्थियों में एक दूसरे से आगे बढ़ने की जो प्रतिस्पद्धा रहती थी वह लगभग खत्म हो गई है। चुनौतियां न तो गत वर्ष खत्म हुई और न ही इस वर्ष में कम होने वाली हैं।

आनलाइन पढ़ाई से उब गए विद्यार्थी 

लंबे समय से विद्यार्थी घर पर रहते हुए आनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। परंतु अब वह आनलाइन पढ़ाई से उब चुके हैं। स्कूलों द्वारा उन्हें जो होमवर्क भेज जा रहा है वह ज्यादातर विद्यार्थियों की समझ में नहीं आ रहा। वहीं विद्यार्थी भी होमवर्क पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। खासकर छोटे बच्चे तो होमवर्क करने की मोबाइल पर वीडियो गेम खेलना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। वहीं सभी विद्यार्थियों के पास अभी तक एंड्रायड माेबाइल नहीं है ताकि वह अपनी पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे।

होनहार विद्यार्थियों को नुकसान : एमके सहगल

शिक्षाविद डा. एमके सहगल का कहना है कि कोरोना महामारी का विद्यार्थियाें के जीवन पर बुरा असर पड़ा है। भिवानी बोर्ड का विद्यार्थियों को अंक देना किसी की समझ में नहीं आया। बोर्ड ने बिना परीक्षा के ही सभी को पास कर दिया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन विद्यार्थियों को है जो हर बार अच्छे अंकों से पास करते थे। जो विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर थे वह भी बोर्ड ने होनहार कर दिए। इसलिए बोर्ड को अंक देते समय गत वर्षों के परिणाम का भी अांकलन करना चाहिए था। आने वाले कुछ सालों में इससे सड़कों पर बेरोजगारों की संख्या बढ़ती दिख सकती है।

नलाइन पढ़ाई कामयाब नहीं 

प्रोफेसर कालोनी के विकास, सरोजनी कालोनी के सचिन का कहना है कि आनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए ज्यादा फयदेमंद नहीं है। शुरुआत में तो विद्यार्थियों ने आनलाइन पढ़ाई को गंभीरता से लिया लेकिन अब ऐसा नहीं है। वहीं इससे इंटरनेट डाटा खर्च बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्र में काफी परिवार ऐसे हैं जिनके पास मोबाइल नहीं है। मोबाइल है तो पिता काम पर जाते वक्त उसे अपने साथ ले जाते हैं। शाम को काम से लौटते हैं तो परिवार में बच्चे एक से अधिक होने के कारण उनमें मोबाइल को लेकर झगड़ा होता है। कोरोना महामारी का विद्यार्थियों पर बुरा असर पड़ा है।

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