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रूस-अमेरिका के न्यू स्टार्ट संधि से क्यों गदगद हुआ चीन। फाइल फोटो।
अमेरिका और रूस New START संधि के तहत 2026 तक न केवल अपने परमाणु हथियारों के विस्तार बल्कि हथियारों की होड़ को भी प्रतिबंधित करेंगे। आखिर चीन का इस संधि से क्या लाभ होने वाला है। फिर उसकी प्रशन्नता के पीछे आखिर गहरे राज क्या हैं।
अमेरिका और रूस के बीच नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) (New Strategic Arms Reduction Treaty) से चीन गदगद है। सवाल यह है कि चीन का इस संधि से क्या लाभ होने वाला है, जबकि वह इस करार का हिस्सा भी नहीं है। फिर उसकी प्रशन्नता के पीछे आखिर गहरे राज क्या हैं।
चीन की प्रशन्नता के पीछे गहरी चाल
- अमेरिका और रूस न्यू स्टार्ट संधि (New START) के लिए राजी हो गए हैं। इस संधि के तहत दोनों देश 2026 तक न केवल अपने परमाणु हथियारों के विस्तार बल्कि हथियारों की होड़ को भी प्रतिबंधित करेंगे। इस संधि से चीन पूरी तरह से बाहर है। इस संधि उसके सैन्य और परमाणु क्षमता के विकास पर कोई असर नहीं होगा।
- चीन को ऐसा लगता है कि इन पांच वर्षों में वह अपनी सैन्य क्षमता का और विस्तार कर लेगा। हालांकि, चीन ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि उसके पास कितने वॉरहेड हैं, लेकिन स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक आकलन ने इसकी संख्या 320 बताई है।
- ऐसे में अमेरिका को पछाड़कर महाशक्ति बनने का सपना देख रहे चीन ने अपने खतरनाक मंसूबे पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। चीन सेना के एक करीबी सूत्र ने कहा है कि हाल के वर्षों में परमाणु हथियारों के भंडार में 1,000 की वृद्धि हुई है, लेकिन उनमें से 100 परमाणु बल इस्तेमान करने की हालत में
- यही नहीं चीन अब लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के निर्माण में जुटा है। इसकी जद में अमेरिका का अधिकांश हिस्सा होगा। इस संधि ने चीन के इस लक्ष्य की राह को और आसान बना दिया है।
- हांगकांग के एक सैन्य विशेषज्ञ और चीन की सेना में रह चुके झोंगपिंग का कहना है कि चीन के पास इस समय केवल 100 एक्टिव परमाणु हथियार है। यह अमेरिका को तबाह करने के लिए काफी नहीं है।
- चीन ने वर्ष 2018 में खुलासा किया था कि उसकी हवा से दागी जाने वाली सीजे-20 क्रूज मिसाइल परमाणु बम दागने में सक्षम है। इसकी मारक क्षमता 20 हजार किमी है। रूस और अमेरिका के बीच इस समझौते के बाद अब चीन को अपने परमाणु हथियारों को बढ़ाने का मौका मिल गया है।
आखिर क्या है न्यू स्टार्ट संधि
- 1980 के दशक में अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ में प्रत्येक के पास 10,000 से अधिक वॉरहेड थे। दो महाशक्तियों के बीच परमाणु मिसाइलों की इस होड़ ने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया था।
- आखिरकार दोनों देश परमाणु हथियारों को घटाने पर राजी हुए। स्टार्ट संधि के तहत दोनों देश अपने परमाणु हथियारों को घटाने पर एक राय हुए।
- वर्ष 2002 में स्ट्रैटेजिक रिडक्शन संधि हुई। इसके तहत अमेरिका ने अपने हथियारों की संख्या को 1,700 की तो रूस ने अपने आयुधों को 2,200 कर दिया। वर्ष 2009 में स्टार्ट-1 संधि समाप्त हो गई। इसके बाद एक नई संधि हुई, जिसका नाम न्यू स्टार्ट संधि रखा गया।
- न्यू स्टार्ट के तहत 5,000 से 6,500 परमाणु शस्त्रों को हटाने का लक्ष्य रखा गया। यह संधि वर्ष 1991 में की गई स्टार्ट-1 का विस्तार है। इसके तहत दोनों देशों ने खुद को 1,600 सामरिक वितरण वाहनों और छह हजार युद्धक हथियारों तक सीमित किया।
- खास बात यह है कि अमेरिका और रूस के बीच नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (न्यू स्टार्ट) के तहत वर्ष 2026 तक न केवल परमाणु हथियारों के विस्तार बल्कि हथियारों की होड़ पर प्रतिबंध लगाते ह